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दुबई / भारतीय मूल के 3 ड्राइवरों ने 41 करोड़ रुपए की लॉटरी जीती; कोरोना से बिजनेस बंद हुआ तो कार बेचने की तैयारी में थे

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दुबई / भारतीय मूल के 3 ड्राइवरों ने 41 करोड़ रुपए की लॉटरी जीती; कोरोना से बिजनेस बंद हुआ तो कार बेचने की तैयारी में थे

केरल के रहने वाले जिजेश कोरोथन (बीच में) शाहजहां कुट्टिकट्टिल (बाएं) और शनोज बालकृष्णन (दाएं) ने 41 करोड़ रुपए की लॉटरी जीती।
केरल के तीन दोस्त लॉटरी की रकम बांटेंगे, कोरोना के चलते कार चलाने का काम बंदी के कगार पर था
इससे पहले भी कई भारतीय जीत चुके हैं जैकपॉट, पिछले साल दो लोगों ने जीती थी 21 और 6 करोड़ की लॉटरी

दुबई. भारतीय मूल के तीन ड्राइवर दुबई में रातों-रात करोड़पति बन गए। ये तीनों मूलरूप से केरल के रहने वाले हैं। इन्होंने शुक्रवार को मेगा जैकपॉट लॉटरी के जरिए करीब 41 करोड़ रुपए की रकम जीती है। खलीज टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, लॉटरी जिजेश कोरोथन के नाम थी। उसने दोस्त शाहजहां कुट्टिकट्टिल और शनोज बालकृष्णन के साथ मिलकर टिकट खरीदा था। इसलिए अब इनाम की रकम भी तीनों ने आपस में बांटने का फैसला लिया है।

जिजेश ने बताया, ”हम तीनों ने मिलकर कुछ दिनों पहले ही लिमोसिन (लग्जरी गाड़ी) चलाने का काम शुरू किया था। लिमोसिन खरीदने के लिए लोन लिया था। लेकिन कोरोनावायरस के चलते टूरिज्म सेक्टर पूरी तरह चौपट हो गया। हमारा काम भी बंद हो चुका है। इसलिए केरल लौटने की तैयारी में थे। कार की ईएमआई भरने के लिए पैसे नहीं थे। इसलिए इसे बेंचकर कर्ज चुकाने का मन बना लिया था। लेकिन ग्राहक से मीटिंग से पहले ही अचानक हमारी किस्मत बदल गई। अब हम आसानी से ईएमआई भर पाएंगे और फिर से काम शुरू कर पाएंगे।”

पिछले साल बिजनेसमैन और ड्राइवर ने भी जीते थे इनाम
2019 में भारतीय बिजनेसमैन प्रबीन थॉमस कि किस्मत भी इस लॉटरी की वजह से बदल चुकी है। थॉमस ने दुबई में 6 करोड़ की लॉटरी जीती थी। प्रबीन भी केरल के रहने वाले हैं। इसके अलावा केरल के जॉन वर्गीज ने लॉटरी में 21 करोड़ रुपए जीते थे। वर्गीज दुबई में प्राइवेट कंपनी में ड्राइवर का काम करते थे।

बेटी की पढ़ाई और बिजनेस में खर्च करेंगे रकम
जिजेश कहते हैं कि वह यह रकम अपनी बेटी की पढ़ाई पर खर्च करेंगे। इसके अलावा शेष रकम अपने लिमोसिन सर्विस के बिजनेस को बढ़ाने में लगाएंगे। यह लॉटरी हमारे लिए जीवनदान की तरह है। जितेश बताते हैं कि यह काम कुछ दिन पहले ही तीनों ने मिलकर शुरू किया था। इसके पहले वह दूसरों की गाड़ियां चलाते थे।

 

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आम लोगों के लिए रतन टाटा का वो सपना, जो अधूरा रह गया

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आपके घर में टाटा का कोई प्रोडक्‍ट न हो, ये नामुमकिन सा है. नमक से लेकर ट्रक बनाने तक के बिजनेस से जुड़े टाटा ग्रुप का इतिहास करीब 150 साल पुराना है. साल 1868 में जमशेदजी टाटा ने टाटा ग्रुप की शुरुआत मुंबई के एक ट्रेडिंग फर्म से की थी जो आज दुनिया भर में अपना विस्‍तार कर चुकी है.

आपके घर में टाटा का कोई प्रोडक्‍ट न हो, ये नामुमकिन सा है. नमक से लेकर ट्रक बनाने तक के बिजनेस से जुड़े टाटा ग्रुप का इतिहास करीब 150 साल पुराना है. साल 1868 में जमशेदजी टाटा ने टाटा ग्रुप की शुरुआत मुंबई के एक ट्रेडिंग फर्म से की थी जो आज दुनिया भर में अपना विस्‍तार कर चुकी है.

साल 2008 की बात है, चेयरमैन रतन टाटा ने जब टाटा मोटर्स  के ”नैनो” कार को लॉन्‍च किया तो उनका मकसद आम लोगों के सपने को पूरा करना था. इस कार की शुरुआती कीमत 1 लाख रुपये थी. कार को जोर-शोर से बाजार में उतार गया. लेकिन उम्‍मीद के मुताबिक कार की बिक्री नहीं हुई.

आज के वक्‍त में हालत ये हो गई है कि ”नैनो” का कोई खरीदार नहीं मिल रहा है. इस वजह से कार का प्रोडक्‍शन तक ठप हो गया है. साल 2019 के पहले 9 महीने यानी सितंबर तक नैनो कार का कोई प्रोडक्‍शन नहीं किया गया है. वहीं साल 2019 में अब तक सिर्फ 1 कार की बिक्री हुई है. यह कार फरवरी में बिकी थी.

अब कयास ये लगाए जा रहे हैं कि टाटा मोटर्स कभी भी नैनो कार के मॉडल को बंद करने का ऐलान कर सकती है. हालांकि आधिकारिक रूप से इस मॉडल को बंद करने के बारे में कोई घोषणा नहीं की गई है. ऐसे में कहा जा सकता है कि रतन टाटा ने जिस सोच के साथ नैनो की शुरुआत की थी वो सही साबित नहीं हुई.

टाटा ग्रुप का कारोबारी साम्राज्‍य
ग्रुप की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक टाटा अलग-अलग कंपनियों के जरिए 100 से अधिक देशों में कारोबार कर रही है. इस ग्रुप का टीसीएस के जरिए आईटी सेक्‍टर में दबदबा है तो वहीं टाटा स्‍टील ने भारत समेत दुनिया भर की स्‍टील इंडस्‍ट्री में अपनी एक खास पहचान बनाई है. इसी तरह ऑटो इंडस्‍ट्री में टाटा मोटर्स समेत अन्‍य व्‍हीकल्‍स ने नाम कमाया है. इसके अलावा कंज्‍यूमर और रिटेल इंडस्‍ट्रीज, इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर इंडस्‍ट्रीज, फाइनेंशियल सर्विसेज, एयरोस्‍पेस और डिफेंस में भी टाटा ग्रुप ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है.

वहीं टूरिज्‍म और ट्रेवल, टेलीकॉम और मीडिया, ट्रेडिंग और इन्‍वेस्‍टमेंट सेक्‍टर में भी टाटा ग्रुप अपना लोहा मनवा रही है. बता दें कि टाटा ग्रुप शिक्षा, सशक्तिकरण, पर्यावरण और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी सक्रिय है. यही नहीं, टाटा ने अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर मैराथन, चेस और टेनिस टूर्नामेंट के अलावा कई तरह के क्‍विज को स्पॉन्सर किया है. इसके अलावा भारत समेत दुनिया के अलग- अलग हिस्‍सों में टाटा ग्रुप का इनोवेशन सेंटर भी है.

क्‍या है टाटा ग्रुप की वर्तमान स्थिति
FY18 में टाटा ग्रुप के रेवेन्‍यू की बात करें तो 7.13 लाख करोड़ रही. वहीं एक साल पहले FY17 में ग्रुप का रेवेन्‍यू 6.53 लाख करोड़ था.

मार्च 2019 तक के आंकड़े बताते हैं कि टाटा ग्रुप के कर्मचारियों की संख्‍या 7 लाख से अधिक थी. वहीं 31 मार्च 2019 तक टाटा ग्रुप का मार्केट 1,111,414 करोड़ रुपये था. एक साल पहले मार्च 2018 में ग्रुप का मार्केट कैप 945,117 करोड़ रुपये था.

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पुरानी तस्वीर देख आनंद महिंद्रा को याद आया बिल गेट्स से जुड़ा यह किस्सा, कहा, ”मुझे उनसे एक शिकायत…”

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यूजर ने अपने ट्वीट में एक तस्वीर शेयर की थी. तस्वीर को शेयर करते हुए यूजर ने लिखा था, ”मैंने नेटफ्लिक्स पर इंसाइड बिल्स ब्रेन- डिकोडिंग बिल गेट्स देखी. इसमें मुझे आपकी यह तस्वीर मिली”.

नई दिल्ली: आनंद महिंद्रा (Anand Mahindra) ने हाल ही में अपने ट्विटर पर एक के बाद एक ट्वीट करते हुए बिल गेट्स (Bill Gates) से जुड़ा एक किस्सा सुनाया. दरअसल, उन्होंने एक यूजर द्वारा ट्वीट की गई एक पुरानी तस्वीर के जवाब में ये ट्वीट्स किए. इस तस्वीर में आनंद महिंद्रा, बिल गेट्स के साथ नजर आ रहे हैं और यह तस्वीर काफी पुरानी लग रही है.
रमेश बाबू नाम के यूजर ने अपने ट्वीट में एक तस्वीर शेयर की थी. तस्वीर को शेयर करते हुए यूजर ने लिखा था, ”मैंने नेटफ्लिक्स पर इंसाइड बिल्स ब्रेन- डिकोडिंग बिल गेट्स (Inside Bills Brain- Decoding Bill Gates) देखी. इसमें मुझे आपकी यह तस्वीर मिली”. इसके बाद यूजर ने लिखा, ”आनंद महिंद्रा आप लोग किस विषय पर इतनी गहन चर्चा कर रहे हैं? यह कब और कहां हुआ?”

इस ट्वीट का जवाब देते हुए आनंद महिंद्रा ने एक के बाद एक चार ट्वीट किए. अपने पहले ट्वीट में आनंद ने लिखा, ”मैंने यह सीरीज नहीं देखी है और मुझे नहीं पता था इस सीरीज में यह फोटो भी है”. महिंद्रा ने आगे लिखा, ”शुक्रिया इस तस्वीर को शेयर करने के लिए क्योंकि यह तस्वीर 1997 की है, जब बिल गेट्स पहली बार भारत आए थे और मेरे पास इस तस्वीर का कोई रिकॉर्ड नहीं है क्योंकि उस वक्त कैमरे वाले मोबाइल नहीं हुआ करते थे. वहां केवल फॉर्च्यून मैैगजीन का एक फोटोग्राफर था”.

अपने दूसरे ट्वीट में उन्होंने लिखा, ”बिल और मैने 1973 में ही हावर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई शुरू की थी लेकिन उन्होंने बीच में कॉलेज छोड़ दिया और माइक्रोसॉफ्ट की शुरुआत की. लेकिन माइक्रोसॉफ्ट की टीम ने यह मीटिंग इसलिए नहीं रखी थी क्योंकि हम क्लासमेट थे बल्कि इसलिए रखी थी क्योंकि उस वक्त भारत में एम एंड एम (Mahindra and Mahindra) WindowsNT 4.0 को शुरू करने वाली पहली कंपनी थी”.

इसके बाद आनंद महिंद्रा ने इस मीटिंग से जुड़ी हुई एक मजेदार कहानी भी सुनाई. अपने अगले ट्वीट में उन्होंने लिखा, ”जब मीटिंग के वक्त बिल कमरे में आए तो उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि हम हार्वड में एक साथ थे. मैंने कहा, हां, लेकिन मुझे आपसे एक शिकायत है. इसके बाद बिल की टीम घबरा गई और उन्हें लगा कि उन्होंने किसी सनकी इंसान के साथ मीटिंग रखी है”.

अपने आखिरी ट्वीट में उन्होंने लिखा, ”हालांकि, बिल ने शांत स्वभाव से पूछा कि उन्हें शिकायत क्यों है? मैंने कहा, मेरी बेटी ने मुझसे पूछा था कि कॉलेज में मेरे साथ पढ़ने वाले कौन-कौन से लोग आज मशहूर हैं और जब मैंने उसे आपका नाम बताया तो उसने कहा कि, आप कितने बड़े हारे हुए इंसान हैं. इसलिए आपका शुक्रिया क्योंकि अब मैं अपने बच्चों के लिए एक हारा हुआ इंसान हूं”.

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सुंदर पिचाई को 1720 करोड़ रुपये का पैकेज, सबसे अधिक वेतन-भत्ते पाने में टेस्ला के सीईओ एलन मस्क टॉप पर

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सबसे अधिक वेतन-भत्ते पाने में टेस्ला के सीईओ एलन मस्क का रिकॉर्ड है। उन्हें साल 2018 में 3591 करोड़ रुपये का पैकेज मिला था। उन्हें फोर्ब्स की लिस्ट में दुनिया के 53वें सबसे अमीर व्यक्ति के तौर पर सूचीब

गूगल की मातृ कंपनी अल्फाबेट के सीईओ सुंदर पिचाई को 1720 करोड़ रुपये का पैकेज मिलेगा। इसमें 1706 करोड़ रुपये (240 मिलियन डॉलर) के शेयर और 14.22 करोड़ रुपये का सालाना वेतन शामिल है। पिचाई का नया वेतन पैकेज जनवरी 2020 से लागू होगा। उनके वेतन में करीब 200 फीसदी का इजाफा हुआ है। यह सर्च इंजन गूगल में अब तक किसी भी सीईओ को दिया गया सबसे बड़ा पैकेज है।

पिचाई को अगले तीन साल में यह राशि तब मिलेगी जब वह अपने सभी लक्ष्य को पूरा कर लेंगे। अगर एस एंड पी 100 इंडेक्स में अल्फाबेट का प्रदर्शन अच्छा रहता है तो पिचाई को 639 करोड़ रुपये (90 मिलियन डॉलर) और मिलेंगे। पिचाई को पिछले महीने ही इस नौकरी के लिए चुना गया था जब गूगल के को-फाउंडर्स लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन ने अपने पद छोड़ दिए थे। उनको गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट का भी सीईओ बनाने का ऐलान 4 दिसंबर को हुआ था।

2016 में 1422 करोड़ : सुंदर पिचाई को इससे पहले भी ऐसे बड़े पैकेज मिलते रहे हैं। उनको 2016 में ऐसे ही 1422 करोड़ रुपये (200 मिलियन डॉलर) का पैकेज दिया गया था। पिचाई ने 2018 में ऐसे ही एक पैकेज लेने से इनकार कर दिया था। पिचाई लंबे समय से बतौर गूगल में बतौर कर्मचारी काम किया। गूगल के पॉपुलर ब्राउजर क्रोम और गूगल एंड्रायड टीम के लीडर के तौर पर काम किया है। पिचाई ने गूगल के कुछ और लोकप्रिय उत्पाद जीमेल, और एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम पर भी काम किया है। वह 2015 में गूगल के सीईओ बने थे।

मस्क सबसे ऊपर

सबसे अधिक वेतन-भत्ते पाने में टेस्ला के सीईओ एलन मस्क का रिकॉर्ड है। उन्हें साल 2018 में 3591 करोड़ रुपये का पैकेज मिला था। उन्हें फोर्ब्स की लिस्ट में दुनिया के 53वें सबसे अमीर व्यक्ति के तौर पर सूचीबद्ध किया गया था।

मदुरै में जन्म हुआ

सुंदरराजन पिचाई का तमिलनाडु के मदुरै में उनका जन्म 12 जुलाई, 1972 को हुआ। उन्होंने आईआईटी खड़गपुर से बीटेक और स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से एमएस करने के बाद अमेरिका की पेन्सिलवेनिया यूनिवर्सिटी से एमबीए की डिग्री हासिल कर रखी है।

शीर्ष तीन आईटी कंपनियों के सीईओ के सालाना वेतन-भत्ते नाम कंपनी वेतन टिम कूक एपल 957 करोड़, सत्या नडेला माइक्रोसॉफ्ट 306 करोड़, सुंदर पिचाई गूगल 135 करोड़ (आंकड़े 2018 के, पिचाई ने तब पैकेज नहीं लिया था)

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