Connect with us

Economy

UAE के बाद अब रूस देगा भारतीय प्रधानमंत्री को अपना सर्वोच्च नागरिक सम्मान, दुनिया ने किया मोदी को सलाम

Published

on

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रूस से आई अच्छी खबर ने मोदी का लोकसभा चुनाव
के बीच विपक्ष के हमलों से दिल को थोड़ी राहत मिली है। प्रधानमंत्री को
दुनिया का एक और सम्मान मिला है मतलब रूस ने पीएम मोदी को अपना सर्वोच्च
नागरिक सम्मान- सेंट एंड्रयू अवॉर्ड देने का फैसला किया है। रूस के
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी इसको मंजूरी दे दी है। पिछले कुछ समय में
प्रधानमंत्री को कई अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं। हाल ही में यूएई ने
भी उन्हें ज़ायद अवॉर्ड देने का ऐलान किया था।
अपने एक बयान में रूस के दूतावास ने कहा है कि प्रधानमंत्री को सेंट
एंड्रयू यानी रूस का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 12 अप्रैल को देने का ऐलान
किया गया है। उन्हे यह सम्मान भारत और रूस के रिश्तों को मजबूत करने के लिए
दिया गया है।

https://twitter.com/RusEmbIndia/status/1116632385485983745
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बाद भारतीय प्रधानमंत्री पहले होंगे जो इस
अवॉर्ड के हकदार होंगे।
https://twitter.com/IndEmbMoscow/status/1116631755467952128

Twitter Ads info and privacy
कुछ समय पहले ही संयुक्त अरब अमीरात ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज़ायद
मेडल देने का ऐलान किया था। यूएई की तरफ से ये सम्मान दोनों देशों के
संबंधों को नई ऊंचाई पर दिए जाने के लिए दिया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र
मोदी ने यूएई के क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद को इस सम्मान के लिए
शुक्रिया भी अदा किया था।
दक्षिण कोरिया ने भी इसी साल फरवरी में प्रधानमंत्री को सियोल शांति
पुरस्कार से सम्मानित किया था। मोदी इस पुरस्कार से सम्मानित होने वाले
पहले व्यक्ति।
दक्षिण कोरिया की ओर से कहा गया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज एक
ग्लोबल लीडर के तौर पर उभर रहे हैं, साथ ही उन्होंने दोनों देशों के संबंध
और अच्छे किए हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संयुक्त
राष्ट्र की तरफ से चैंपियंस ऑफ अर्थ का सम्मान भी दिया जा चुका है।
भारत में प्रधानमंत्री मोदी को विपक्षी पार्टियां लगातार उनके विदेशी दौरों
के लिए निशाने पर लेती रही है, तो दूसरी ओर पीएम मोदी और विदेश मंत्री
सुषमा स्वराज अपनी सरकार की विदेश नीति को ऐतिहासिक बताती है। इस बीच एक और
पुरस्कार मिलना पीएम के लिए अच्छी खबर साबित हो सकता है।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Economy

बदलेंगे SBI के नियम, 42 करोड़ ग्राहकों पर होगा सीधा असर, 1 मई से होंगे बदलाव

Published

on

देश के सबसे बड़े बैंक और सरकारी बैंक एसबीआई की ब्याज दरों को लेकर 1 मई से नए नियम लागू होंगे। बैंक में इस बदलाव से 40 करोड़ से भी ज्यादा ग्राहकों पर असर पड़ने की उम्मीद है।
दरसल, देश में सरकार द्वारा चलने वाले बैंक एसबीआई ने अपने ब्याज की दरों और लोन को RBI की बैंचमार्क दर से जोड़ दिया गया है मतलब अब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के रेपो रेट में बदलाव होने की वजह से बैंक मे जमा राशि और लोन की दरों पर असर होगा।
लेकिन यह नियम केवल 1 लाख रूपये से ज्यादा के जमा और लोन के ब्याज दरों पर ही लागू होगी। इस नियम के लागू होने के बाद ग्राहकों को पहले की तुलना में उनके बचत खाते पर कम ब्याज मिलेगा। एसबीआई के 95 फीसदी के करीब ग्राहकों पर इसका अनुमान पड़ने का अनुमान है।
नए नियम लागू होने के बाद पहले की तरह एसबीआई के ग्राहकों को 1 लाख रूपये रखने तक पर 3.5 फीसदी ब्याज मिलेगा।
हाल ही में RBI की ओर से ब्याज दरों में 0.25 फीसदी की कटौती की गई थी, जिसके बाद एसबीआई समेत कई बैंको ने होम लोन और ऑटो लोन की ब्याज दरो में कटौती की, एसबीआई 0.05 फीसदी की मामूली कटौती की है।
30 लाख रूपये तक संशोधित दर में होम लोन पर एसबीआई ने ब्याज दर में 0.10  फीसदी की कटौती की है। 30 लाख रूपये से कम के होम लोन पर नई ब्याज दर लगेंगी जो कि 8.60 से 8.90 फीसदी होगी जो की इस वक्त 8.70 से 9 फीसदी है।

Continue Reading

Amir

कल होने वाली है Students Strike, सौ से अधिक देश दे रहे साथ, जानें पूरा मामला

Published

on

  • 15 मार्च का दिन हम सभी के लिए बेहद खास है। खास इसलिए
  • क्‍योंकि हमारे हितों के लिए सौ से अधिक देशों के छात्र हड़ताल कर रहे हैं।

नई दिल्‍ली । पर्यावरण को लेकर आज पूरी दुनिया चिंता जता रही है। अफसोस की बात ये है कि इस मुद्दे पर विकसित और विकासशील देशों के बीच आरोप-प्रत्‍यारोप जारी हैं। इस बीच वैज्ञानिक लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि यदि अब भी नहीं संभले तो भविष्‍य में होने वाले नुकसान के लिए इंसान को तैयार रहना पड़ेगा। पर्यावरण को लेकर कुछ लोग पूरी दुनिया में अपनी-अपनी तरह से काम भी कर रहे हैं। अब इस मुद्दे पर 15 मार्च को छात्र हड़ताल करने वाले हैं। शुक्रवार को होने वाली इस हड़ताल में 105 देश शामिल हो रहे हैं। दुनियाभर के करीब डेढ़ हजार से अधिक शहरों में स्‍कूली बच्‍चे पर्यावरण के मुद्दे पर हड़ताल करेंगे। दरअसल, इस हड़ताल के पीछे छात्रा है जिसका नाम ग्रेटा थनबर्ग है। स्‍वीडन की छात्रा ने जलवायु परिवर्तन के खिलाफ उठाए गए कदमों को नाकाफी बताया है। 16 वर्षीय ग्रेटा पूरी दुनिया में इस मुद्दे पर होने वाली स्‍टूडेंट्स स्‍ट्राइक को लेकर काफी सुर्खियां बटोर रही हैं।

कौन है ग्रेटा
पूरी दुनिया के लिए पहचान बनी ग्रेटा को नॉर्वे के तीन सांसदों ने नोबेल पुरस्‍कार के लिए नामित भी किया है। जहां तक ग्रेटा की बात है तो आपको बता दें कि उन्‍हें पिछले वर्ष नवंबर 2018 में इस मुद्दे पर TEDxStockholm में बतौर वक्‍ता बुलाया गया था। इसके अलवा दिसंबर में संयुक्‍त राष्‍ट्र की क्‍लाइमेट चेंज कांफ्रेंस में भी बुलाया गया था। इतना ही नहीं जनवरी 2019 में दावोस में हुई वर्ल्‍ड इकनॉमिक फोरम में भी उसे बुलाया गया था। इस दौरान उन्‍होने उनके भाषण से सभी नेता काफी हैरान थे। दरअसल, उन्‍होंने कहा था कि वह उन्‍हें आश्‍वस्‍त नहीं देखना चाहती हैं बल्कि इस मुद्दे पर परेशान देखना चाहती हैं। नेताओं को पर्यावरण को बचाने के लिए ऐसे घोड़े की तरह व्‍यवहार करना चाहिए जो आग में घिरा हो और बाहर निकलने के लिए छटपटा रहा हो। टाइम मैगजीन ने वर्ष 2018 की सबसे प्रभावशाली किशोरी के तौर पर शामिल किया था।

#FridaysForFuture
थनबर्ग का कहना है कि लोगों को इस स्कूली हड़ताल से काफी उम्मीदे हैं। उनका यह भी कहना है कि वो और उनके साथ में आए बच्‍चे अब ऐसा करने के लिए युवा हो चुके हैं। इसके बावजूद सत्ता में बैठे लोगों को इसके लिए काफी कुछ करना चाहिए। पर्यावरण को बचाने के लिए उन्‍होंने #FridaysForFuture और #SchoolsStrike4Climate नाम से मुहिम शुरू की है। उन्‍होंने पिछले वर्ष इस मुहिम की शुरुआत की थी। इसके लिए वह स्वीडिश पार्लियामेंट तक साइकिल पर गईं और वहां पर हाथ से बना साइनबोर्ड लेकर बैठी रही थीं। इस पर लिखा था ‘जलवायु के लिए स्कूली हड़ताल’। उनके इस संदेश को भी काफी पसंद किया गया, जिसमें बताया गया था कि युवाओं को स्कूल जाने की जरूरत होती है, लेकिन जब तक मनुष्य जलवायु परिवर्तन के पहले से ही विनाशकारी प्रभावों को सक्रिय रूप से नहीं बदलते, शिक्षा कोई काम नहीं कर सकती। अब ये दुनियाभर के नेताओं पर निर्भर है कि वह बदलाव के लिए कुछ करें, ताकि उनकी पीढ़ी को विरासत में मिले। ग्रेटा का कहना है कि पर्यावरण की सुरक्षा के लिए सिर्फ रैलियां करने भर से कुछ नहीं होने वाला है।

सलिए बेहद खास है मुहिम

पर्यावरण को बचाने के लिए चलाई जा रही उनकी यह मुहिम इस लिहाज से भी बेहद खास है क्‍योंकि हाल ही में वैज्ञानिकों ने चेताया है कि जलवायु परिवर्तन के कारण न केवल विश्व का औसत तापमान बढ़ा है, बल्कि गर्मी के मौसम में चलने वाली लू की तपन में भी बहुत बढ़ोतरी हुई है। यह गर्मी न सिर्फ लोगों के लिए बल्कि वन्यजीवों के लिए भी जानलेवा साबित हो रही है। शोधकर्ताओं की मानें तो बढ़ते तापमान के चलते लू से जितनी मौतें 2003 में यूरोप में हुई थीं 21वीं सदी के अंत तक जब तापमान पहले से चार गुणा अधिक हो जाएगा तो इससे होने वाली मौतों का आंकड़ा भी काफी बढ़ जाएगा।

Continue Reading

Economy

6 American Nuclear Power Plants to be build in India, India and US agree on the same

Published

on

On Wednesday, the two countries, India and the United States, both agreed to build strong security and have civil nuclear co-orperation, hence, building six american nuclear power plant in India, a joint statement was given by the two countries.
As India is the third biggest buyer of oil in the world, the President of United Nations, Mr Donald Trump, was in an urge to sell more energy products to India. The approval to build six nuclear power plants came after two days of discussion in Washington. Indian Foreign Secretary Vijay Gokhale and Andrea Thompson, the US undersecretary of state for arms control and international security were present during the discussion for the approval of the agreement.
“They committed to strengthen bilateral security and civil nuclear cooperation, including the establishment of six U.S. nuclear power plants in India,” the joint statement said.
The discussion to get the supply of nuclear reactors to India is being continued from more than a decade but it was not done as there was a need to bring the Indian liability rules in-line with international norms, which required the costs.
Pittsburgh-based Westinghouse has been negotiating to build reactors in India for years, but progress has been slow, partly because of India’s nuclear liability legislation, and the project was thrown into doubt when Westinghouse filed for bankruptcy in 2017 after cost overruns on U.S. reactors.
The agreement to build the reactors, announced in 2016, followed on from a US-India civil nuclear agreement signed in 2008.
India plans to triple its nuclear capacity by 2024 to wean Asia’s third-largest economy off polluting fossil fuels.

Continue Reading
Advertisement
Advertisement

Trending