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केएल ओर पांड्या अब दुबारा खेलेंगे अपनी पारी

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टीवी कार्यक्रम के दौरान आपत्तिजनक टिप्पणियों के कारण निलंबन झेल रहे भारतीय क्रिकेटर हार्दिक पांड्या और केएल राहुल अब दुबारा से क्रिकेट के मैदान में अपनी अपनी पारी खेलने के लिए तैयार हैं। 11 जनवरी को इन दोनो खिलाडियों को बीसीसीआई ने दोनों क्रिकेटरों को मैच से निलंबित कर दिया गया था लेकिन प्रशासकों की समिति (सीओए) ने गुरूवार को दोनो को राहत दे तत्काल प्रभाव से इन दोनों के निलंबन को हटा दिया।

निलंबन हटाने का फैसला सीओए ने नए न्यायमित्र पीएस नरसिम्हा से राय लेने का बाद किया। जांच के लिए सुप्रिम कोर्ट को लोकपाल नियुक्त करना है, शीर्ष अदालत ने इस मामले को पांच फरवरी को अस्थाई रूप से सूचिबध्द किया है।

बीसीसीआई ने सीओए का बयान जारी करते हुए कहा कि यह फैसला न्यायमित्र पीएस नरसिम्हा की सहमति से लिया गया है। मामले को देखते हुए 11 जनवरी के निलंबन आदेशों को लोकपाल की न्युक्ति और उनके द्वारा फैसला लिए जाने तक तुरंत प्रभाव से हटा दिया गया है।

राहुल घरेलू क्रिकेट या भारत ए की तरफ से इंगलैंड लायंस के खिलाफ खेल सकते है। सीओए ने कहा कि इन दोनों खिलाडियों को निलंबित करने का फैसला बीसीसीआई के संविधान के नियम 46 के तहत लिया गया था। यह खिलाडियों के व्यवहार से संबंधित है।

इन दोनों ही खिलाडियों पर से निलंबन हटाने के लिए बीसीसीआइ के कार्यकारी अध्यक्ष सीके खन्ना ने पहल की थी।

उनका मानना था कि जांच लंबित रहने तक निलंबन रहने तक निलंबन हटाया जाना चाहिए। इसके साथ ही कई अन्य खिलाड़ी भी इस पक्ष में थे कि उन्हें एक मौका दिया जाना चाहिए।

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चीन ने पलटी बाजी, अब नहीं देगा पाकिस्तान का साथ

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जम्मू कश्मीर के पुलवामा जिले में आतंकी हमले के बाद पूरी दुनिया आतंकवाद
के खिलाफ जिस तरह से भारत के साथा खड़ी दिखी थी उससे उम्मीद जगी थी की अब
तो चीन आतंकी सरगना मसूद अजहर को लेकर अपनी राय बदलेगा। उम्मीद की जा रही
थी कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चीन मसूद अजहर को ग्लोबल टेररिस्ट
घोषित किए जाने का समर्थन करेगा, ताकि आतंकी मसूद अजहर पर शिकंजा पूरी तरह
से कसा जा सके। लेकिन इस बार भी चीन से उम्मीद लगाने का कोई फायदा नही हुआ
पिछले तीन बार की तरह चीन ने चौथी बार भी धोखा ही दिया।
संयुक्त राष्ट्र को दोखा देने के बाद अब अचानक से चीन ने अपनी राय बदल दी।
अब चीन मसूद अज़हर को नहीं बचाएगा। चीन ने संयुक्त राष्ट्र में मसूद का
मसला जल्द हल होने की बात कही है। अचानक ये कह चीन ने पाकिस्तान की
मुश्किलें बढ़ा दी हैं। भारत में चीन के राजदूत लुओ झाहुई ने भरोसा दिलाया
है कि यूएन में मसूद अजहर का मामला जल्द ही निपटाया जाएगा। उन्होंने कहा कि
मसूद का मामला अभी टेक्निकल होल्ड पर रखा गया है।
चीन अब तक चार बार संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में वीटो का इस्तेमाल
कर मसूद अजहर को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित किए जाने से रोकता आया है, मगर अब
सभी देशों एकतरफा होने और चीन का अकेले होने के बाद पहली बार चीन ने मसूद
के बारे में इस तरह की बातें कही हैं।
हिंदुस्तान में बीते 16 वर्षों मे हुए बीस से भी ज्यादा आतंकी हमलों का
गुनहगार, सैकड़ों बेगुनाहों का क़ातिल और दुनिया के सबसे घाघ आतंकवादियों
में से एक ये है मौलाना मसूद अज़हर। मसूद अज़हर के संगठन जैश-ए-मोहम्मद को
2001 में ही संयुक्त राष्ट्र संघ ने आतंकवादी संगठन करार दे दिया था लेकिन
18 वर्षों से अब तक यह फैसला नही हो पाया है कि जिसका संगठन आतंकवादी है उस
संगठन के मुख्य को आतंकवादी करार दिया जाए या नहीं?
भारत में पूर्वजों से चलती आई एक बड़ी पुरानी कहावत है, एक हाथ दे-एक हाथ
ले। मगर ये कहावत चीन के रास्ते पाकिस्तान पहुंचते पहुंचते बदलने लगती है।
पाकिस्तान के साथ चीन इस कहावत को थोड़ा बदलकर इस्तेमाल करता है। यानी एक
हाथ दे और कई हाथ ले। हिंदुस्तानी कहावत के इस चीनी स्टाइल को थोड़ा आसान
लफ्ज़ों में समझिए। इसका मतलब ये है कि आतंक के मामले में तो चीन दुनिया के
पटल पर पाकिस्तान की बेइज़्ज़ती होने से बचा लेगा। मगर पाकिस्तान को उसके
इस एहसान का बदला चुकाना होगा और ये बदला थोड़ा चीनी स्टाइल में होगा।
पिछले 18 सालों से.. यानी 2001 के संसद हमलों से 2019 के पुलवामा हमले तक
पाकिस्तान का ये खूंखार आतंकी एक के बाद एक भारत को कई ज़ख्म दे चुका है।
दुनिया के तमाम देशों ने माना की जैश का ये सरगना पूरी इंसानियत के लिए
खतरा है। लिहाज़ा इसे ग्लोबल टेरेरिस्ट घोषित किया जाना चाहिए ताकि आतंक पर
नकेल कसी जा सके. मगर पिछले 10 सालों से चीन आतंक के इस सरगना की ढाल बना
बैठा है और जब-जब भारत ने इसे ग्लोबल टेररिस्ट लिस्ट में डालने की कोशिश
तब-तब चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अड़ंगा डालने की कोशिश की।
हालांकि पुलवामा हमले के बाद इस बार 27 फरवरी को ये प्रस्ताव फ्रांस,
ब्रिटेन और अमेरिका लाया था। 10 से ज़्यादा देशों ने प्रस्ताव का समर्थन
किया जिसमे तय किया गया कि अगर सुरक्षा परिषद के किसी सदस्य को इस पर
ऐतराज़ ना हुआ तो जैश के सरगना मसूद अज़हर को अंतर्राष्ट्रीय आतंकी घोषित
करार कर दिया जाएगा। इस लिहाज़ से प्रस्ताव की समय सीमा बुधवार यानी 13
मार्च रात 12:30 बजे खत्म हो रही थी। इस बात से एसा लग रहा था कि मसूद को
उसके किए की सज़ा मिल ही जाएगी। मगर प्रस्ताव की समय सीमा खत्म होने से ठीक
एक घंटे पहले चीन ने इस पर अड़ंगा लगा दिया।
चीन ने कहा कि वो पहले भी कह चुका है कि बिना सबूतों के कार्रवाई ग़लत ह,.
जिस पर अमेरिका ने चीन से गुजारिश की थी कि वो समझदारी से काम लें क्योंकि
भारत-पाक में शांति के लिए मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित करना जरूरी है। चीन
के अड़ंगे के बाद मसूद अज़हर को अंतर्राष्ट्रीय आतंकी घोषित किए जाने की एक
और कोशिश नाकाम हो गई। हालांकि इस प्रस्ताव पर अड़ंगे के बाद सुरक्षा परिषद
के सदस्यों ने चीन को साफ चेतावनी दी है कि अगर वो मसूद अज़हर को लेकर अपने
रुख को नहीं बदलेगा तो कार्रवाई के दूसरे विकल्प भी खुले हैं।
कुल मिलाकर पिछले 10 सालों में चीन मसूद अजहर को बचाने के लिए चार बार चाल
चल चुका है। 2009 में भारत खुद ये प्रस्ताव लेकर आया था। वहीं 2016 में
भारत ने पी-3 यानी अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने मिलकर प्रस्ताव पेश किया
था। 2017 में पी-3 देशों ने ही ये प्रस्ताव पेश किया था, और इस बार भी
पुलवामा आतंकी हमले के बाद ये प्रस्ताव फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका लेकर
आया।
हालांकि इस बार चीन ने इस प्रस्ताव को गिराने के लिए वीटो पॉवर का इस्तेमाल
नहीं किया है, बल्कि सूत्रों के मुताबिक चीन ने प्रस्ताव को ‘टेक्निकल
होल्ड’ पर रखा है। टेक्निकल होल्ड का मतलब है कि उसे प्रस्ताव पर विचार
करने के लिए कुछ और वक्त चाहिए। इस लिहाज़ से ऐसा नहीं है कि मसूद अज़हर के
सिर पर लटकी अंतर्राष्ट्रीय आतंकी घोषित होने की तलवार हट गई है, नतीजा जो
भी हो लेकिन अब मसूद अजहर को लेकर चीन का नया बयान उम्मीद जगाता है।

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पीटीआई के मुताबिक चीन की हरकत की वजह से सरकार ले सकती है फैसला।

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अगर आप बाहर देश से गिफ्ट लेते हैं तो आने वाले समय में काफी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। न्यूज एजेनसी पीटीआई की खबर के अनुसार चीन की हरकतों से परेशान होने की वजह से सरकार इस संबध पर फैसला ले सकती है।

दरसल सरकार ने विदेशों से गिफ्ट भेजने की आड़ में माल के साथ छेड़ छाड़ करने की घटनाओं को लेकर काफी परेशान है। इन घटनाओं को रोकने के लिए सरकार कई बड़े कदम उठा सकती है वहीं एक अधिकारी ने कहा की हर साल प्रति व्यकित के हिसाब से 4 गिफ्ट मंगाने की बात की जा रही है साथ ही कई और कदम उठाए जाने पर भी विचार किया जा रहा है। फिलहाल वर्तमान में पांच हजार तक के गिफ्ट भेजे जाने पर टोल टेक्स से छूट है।

स्पेशलिस्टस के मुताबिक चीन के एप आधारित और ई-वाणज्यिय कंपनियां भारत के विदेश व्यापार कानून का गलत ईस्तेमाल कर रही है। इसके तहत भारत में 5,000 रूपये तक के प्रोडेक्ट को गिफ्ट के रूप में भारत को फ्री भेजा जा रहा था। सितम्बर, 2018 में ई – कॉमर्स पर स्थायी समूह की बैठक हुई और इस मुद्दे पर विचार विमर्श किया गया।

अधिकारी ने बताया की कुछ विकल्पों पर स्थायी समूह ने राजस्व विभाग को विचार करने को कहा है। इनमें संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने के लिए ये पता करना आवश्यक होगा कि गिफ्ट किस देश से आया है, प्रोडेक्ट बेजने बाले के बारे में इत्यदि। टोल टेक्स के ज़रिए दी जाने वाली छूट को भी बन्द करने की बात की जा रही है। साथ ही प्रति व्यकित के लिए गिफ्ट मंगाने की संख्या 4 करने के लिए भी कहा जा रहा है।

साथ ही अधिकारी ने कहा 5,000 रुपये की सीमा को एक ही गिफ्ट भेजने वाले या निर्धारित आधार/ केवाईसी का पालन करने वाली युनिट्स तक ही सिमीत किया जा सकता है।

ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ साथ कई कंपनियों ने चिंता जताई थी चीन की ऑनलाइन कंपनियों को भारत से एसे ऑर्डरो की संख्या बढ़ रही है और कंपनियां इसके तहत शुल्क सीमा ले बचते हुए ऑर्डर डिलिवर कर रही है।

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चीन के लोगों के लिए खुशखबरी, लोग फ्री में चला सकेंगे WiFi, होने जा रहा है ऐसा

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चीन की एक कंपनी पूरी दुनिया को निशुल्क वाईफाई उपलब्ध कराने वाला पहला उपग्रह लेकर आई है. इसका प्रक्षेपण अगले साल किया जाएगा.

चीन के लोगों के लिए खुशखबरी, लोग फ्री में चला सकेंगे WiFi, होने जा रहा है ऐसा
China की एक कंपनी पूरी दुनिया को निशुल्क वाईफाई उपलब्ध कराने वाला पहला उपग्रह लेकर आई है. इसका प्रक्षेपण अगले साल किया जाएगा. कंपनी लिंकश्योर नेटवर्क के अनुसार, उपग्रह चीन के पश्चिमोत्तर में स्थित गांसू प्रांत में स्थित जियुकान सेटेलाइट लांच सेंटर से अगले साल लांच किया जाएगा और 2020 तक अंतरिक्ष में ऐसे 10 उपग्रह होंगे. अंतरिक्ष में 2026 तक 272 उपग्रह होंगे.

पीपुल्स डेली में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, उपग्रह द्वारा उपलब्ध कराई गई इंटरनेट सेवा के लिए उपयोगकर्ता अपने मोबाइल फोन का उपयोग कर सकते हैं. रिपोर्ट के अनुसार, लिंकश्योर की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) वांग जिंगयिंग ने कहा कि कंपनी इस परियोजना में तीन अरब यूआन (43.14 करोड़ डॉलर) का निवेश करेगी. उनका मानना है कि परिदृश्यों, एप्लीकेशनों और मोड के माध्यम से कंपनी भविष्य में कमाई कर सकती है.

टिप्पणियां संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, 3.9 अरब लोग 2017 के अंत तक भी इंटरनेट की पहुंच से दूर थे. फिलहाल गूगल, स्पेसएक्स, वनवेब और टेलीसेट जैसी कई विदेशी प्रौद्योगिकी कंपनियों ने निशुल्क इंटरनेट उपलब्ध कराने के लिए उपग्रह के उपयोग की परियोजनाएं लांच की हैं.

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