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स्वीडिश YouTube चैनल PewDiePie और T-Series में नंबर-1 की जंग, सोशल मीडिया पर घमासान

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YouTube पर बादशाहत कायम करने की जंग जारी है. दुनिया के नंबर-1 यूट्यूबर PewDiePie और T-Series में अब ज्यादा फासला नहीं है. PewDiePie के फैंस लगातार लड़ाई लड़ रहे हैं ताकि नंबर-1 खिसक कर दूसरे नंबर पर न आ जाए. जबकि T-Series के लिए भारत में ऑनलाइन अभियान चल रहे हैं.

यूट्यूब पर सबसे ज्यादा सब्सक्राइब किया गया चैनल कौन सा है, इस पर लड़ाई दुनिया भर में असली दुनिया में फैली हुई थी जब फेलिक्स “प्यूडीपी” केजेलबर्ग के प्रशंसकों ने स्वीडिश स्टार के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रचार करना शुरू किया था। अधिकांश भाग के लिए जमीनी प्रयासों में अच्छा मजा आया है – लेकिन हाल ही में, सोशल मीडिया के लोगों ने किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा हैक किया है जो उन्हें प्यूडीपी की सदस्यता लेने का आग्रह कर रहा है।

केजेलबर्ग ने अब YouTube पर शीर्ष चैनल के रूप में अपनी स्थिति बनाए रखी है, लेकिन हाल ही में, सिंहासन के लिए उनके दावे को भारतीय संगीत उत्पादन कंपनी के स्वामित्व वाले एक चैनल टी-सीरीज़ ने तेजी से धमकी दी है। 2018 में टी-सीरीज़ की विकास दर विस्फोटक रही है: वर्तमान में इसमें 72 मिलियन से अधिक ग्राहक हैं, जो इसे लगभग 150,000 प्रशंसकों द्वारा केजेलबर्ग के पीछे रखते हैं। टी-सीरीज़ के ग्राहक प्रक्षेपवक्र के आधार पर, कई दर्शक अनुमान लगाते हैं कि चैनल अंततः पेडडिपी को बढ़ा देगा, लेकिन केजेलबर्ग और उनके प्रशंसकों ने लड़ाई लड़ी है।

केजेल्बर्ग के हालिया अपलोड अक्सर सेगमेंट फ़ीचर करते हैं जहां वह प्रशंसकों से लोगों को सब्सक्राइब करने के लिए मनाने के लिए कहता है। नतीजतन, PewDiePie प्रशंसकों ने पोस्टर को क्लब में टी-सीरीज़ के खिलाफ केजेल्बर्ग के असहमत ट्रैक खेलने के लिए सबकुछ किया है। वन यूट्यूब ने एक शहरव्यापी विज्ञापन अभियान लॉन्च किया जहां उन्होंने प्रत्येक एकल बिलबोर्ड, रेडियो स्पॉट और स्थानीय टीवी स्पॉट खरीदा जो कि प्यूडीपी के चैनल के समर्थन में उपलब्ध था। साथ में, प्रशंसकों ने यह सुनिश्चित किया है कि केजेल्बर्ग किसी भी अपेक्षा से अधिक समय तक टी-सीरीज़ से काफी कम रहता है।


पिछले कुछ दिनों में, ट्विटर उपयोगकर्ता इंटरनेट से जुड़े प्रिंटर से अनचाहे प्रिंटआउट के स्क्रीनशॉट पोस्ट कर रहे हैं, जो कहते हैं कि PewDiePie को उनकी मदद की ज़रूरत है। “यूट्यूब पर वर्तमान में सबसे अधिक सब्सक्राइब किए गए प्यूडपी, टी-सीरीज़ नामक भारतीय कंपनी द्वारा नंबर एक की स्थिति के रूप में अपनी स्थिति खोने की हिस्सेदारी है, जो बॉलीवुड ट्रेलरों और अभियानों के वीडियो अपलोड करता है।” प्रिंटआउट लोगों को Kjellberg की सदस्यता लेने और YouTube दौड़ के बारे में “आपको बताए गए सभी को बताएं” कहता है। अंत में, एक “ब्रोफिस्ट” का एएससीआईआईआई आंकड़ा है, जो एक संकेत है कि केजेलबर्ग के लिए जाना जाता है। स्क्रीनशॉट में कोई विशिष्ट उत्पत्ति नहीं है; कनाडा से यूके के उपयोगकर्ताओं ने इसे स्पष्ट रूप से प्राप्त किया है।

ट्विटर पर एक हैकर ने प्रिंटआउट की जिम्मेदारी ली है, यह बताते हुए कि स्टंट स्पष्ट रूप से प्रिंटर सुरक्षा के बारे में जागरूकता बढ़ाने का अपना तरीका है।

@ TheHackerGiraffe की ट्वीट्स के अनुसार, उन्होंने दुनिया भर के सैकड़ों हजारों प्रिंटर पर उपलब्ध एक खुले नेटवर्क पोर्ट का लाभ उठाया। यह एक ज्ञात भेद्यता है जो प्रिंटर को डेटा प्राप्त करने की अनुमति देती है। ऐसा करने के लिए, हैकर का दावा है कि उन्होंने प्रीटी नामक एक उपकरण का उपयोग किया था, जो कि इसके गिटहब पेज के अनुसार, हमलावरों को “कैप्चर [ई] या मैनिपुलेट [ई] प्रिंट जॉब्स, प्रिंटर की फाइल सिस्टम और मेमोरी तक पहुंचने या यहां तक ​​कि शारीरिक क्षति का कारण बनने की अनुमति देता है डिवाइस पर। ”

“आपका प्रिंटर उजागर हुआ है,” TheHackerGiraffe ने ट्विटर पर एक उपयोगकर्ता को बताया। “मैं आपको इसे बंद करने के लिए चेतावनी देने की कोशिश कर रहा हूं, मैं आपका ध्यान कैसे प्राप्त करूं?”

“मुझे नहीं लगता था कि यह काम करेगा जब मैंने ऐसा किया था,” TheHackerGiraffe ट्विटर पर कहा। वेज हैकर के पास पहुंच गया है, जिससे उन्हें शोषण के लिए सबूत मिल रहा है, और हम वापस सुनकर एक बार इस पोस्ट को अपडेट करेंगे।

30 नवंबर 1:10 अपराह्न को अपडेट करें: TheHackerGiraffe ने वेर्ज को बताया कि इंटरनेट से जुड़े उपकरणों के लिए एक भंडार Shodan.io ब्राउज़ करते समय उन्हें हैक के लिए विचार मिला। यहां, वे दावा करते हैं कि उन्हें 800,000 उपलब्ध प्रिंटर मिले, और उनमें से 50,000 पर हमला करने का फैसला किया।

TheHackerGiraffe ने कहा, “लोग कम आकलन करते हैं कि एक दुर्भावनापूर्ण हैकर कितना आसान हो सकता है जिससे इस तरह की भेद्यता का कारण बन सकता है।” “हैकर्स फाइलों को चुरा सकता है, मैलवेयर स्थापित कर सकता है, प्रिंटर को भौतिक नुकसान पहुंचा सकता है और प्रिंटर को आंतरिक नेटवर्क में पैरहॉल के रूप में भी इस्तेमाल कर सकता है।

“सबसे भयावह हिस्सा यह है: मैंने पहले कभी हैकिंग प्रिंटर नहीं माना, पूरी शिक्षा, डाउनलोडिंग और स्क्रिप्टिंग प्रक्रिया में 30 मिनट से ज्यादा समय नहीं लगा।”

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Business

आम लोगों के लिए रतन टाटा का वो सपना, जो अधूरा रह गया

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आपके घर में टाटा का कोई प्रोडक्‍ट न हो, ये नामुमकिन सा है. नमक से लेकर ट्रक बनाने तक के बिजनेस से जुड़े टाटा ग्रुप का इतिहास करीब 150 साल पुराना है. साल 1868 में जमशेदजी टाटा ने टाटा ग्रुप की शुरुआत मुंबई के एक ट्रेडिंग फर्म से की थी जो आज दुनिया भर में अपना विस्‍तार कर चुकी है.

आपके घर में टाटा का कोई प्रोडक्‍ट न हो, ये नामुमकिन सा है. नमक से लेकर ट्रक बनाने तक के बिजनेस से जुड़े टाटा ग्रुप का इतिहास करीब 150 साल पुराना है. साल 1868 में जमशेदजी टाटा ने टाटा ग्रुप की शुरुआत मुंबई के एक ट्रेडिंग फर्म से की थी जो आज दुनिया भर में अपना विस्‍तार कर चुकी है.

साल 2008 की बात है, चेयरमैन रतन टाटा ने जब टाटा मोटर्स  के ”नैनो” कार को लॉन्‍च किया तो उनका मकसद आम लोगों के सपने को पूरा करना था. इस कार की शुरुआती कीमत 1 लाख रुपये थी. कार को जोर-शोर से बाजार में उतार गया. लेकिन उम्‍मीद के मुताबिक कार की बिक्री नहीं हुई.

आज के वक्‍त में हालत ये हो गई है कि ”नैनो” का कोई खरीदार नहीं मिल रहा है. इस वजह से कार का प्रोडक्‍शन तक ठप हो गया है. साल 2019 के पहले 9 महीने यानी सितंबर तक नैनो कार का कोई प्रोडक्‍शन नहीं किया गया है. वहीं साल 2019 में अब तक सिर्फ 1 कार की बिक्री हुई है. यह कार फरवरी में बिकी थी.

अब कयास ये लगाए जा रहे हैं कि टाटा मोटर्स कभी भी नैनो कार के मॉडल को बंद करने का ऐलान कर सकती है. हालांकि आधिकारिक रूप से इस मॉडल को बंद करने के बारे में कोई घोषणा नहीं की गई है. ऐसे में कहा जा सकता है कि रतन टाटा ने जिस सोच के साथ नैनो की शुरुआत की थी वो सही साबित नहीं हुई.

टाटा ग्रुप का कारोबारी साम्राज्‍य
ग्रुप की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक टाटा अलग-अलग कंपनियों के जरिए 100 से अधिक देशों में कारोबार कर रही है. इस ग्रुप का टीसीएस के जरिए आईटी सेक्‍टर में दबदबा है तो वहीं टाटा स्‍टील ने भारत समेत दुनिया भर की स्‍टील इंडस्‍ट्री में अपनी एक खास पहचान बनाई है. इसी तरह ऑटो इंडस्‍ट्री में टाटा मोटर्स समेत अन्‍य व्‍हीकल्‍स ने नाम कमाया है. इसके अलावा कंज्‍यूमर और रिटेल इंडस्‍ट्रीज, इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर इंडस्‍ट्रीज, फाइनेंशियल सर्विसेज, एयरोस्‍पेस और डिफेंस में भी टाटा ग्रुप ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है.

वहीं टूरिज्‍म और ट्रेवल, टेलीकॉम और मीडिया, ट्रेडिंग और इन्‍वेस्‍टमेंट सेक्‍टर में भी टाटा ग्रुप अपना लोहा मनवा रही है. बता दें कि टाटा ग्रुप शिक्षा, सशक्तिकरण, पर्यावरण और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी सक्रिय है. यही नहीं, टाटा ने अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर मैराथन, चेस और टेनिस टूर्नामेंट के अलावा कई तरह के क्‍विज को स्पॉन्सर किया है. इसके अलावा भारत समेत दुनिया के अलग- अलग हिस्‍सों में टाटा ग्रुप का इनोवेशन सेंटर भी है.

क्‍या है टाटा ग्रुप की वर्तमान स्थिति
FY18 में टाटा ग्रुप के रेवेन्‍यू की बात करें तो 7.13 लाख करोड़ रही. वहीं एक साल पहले FY17 में ग्रुप का रेवेन्‍यू 6.53 लाख करोड़ था.

मार्च 2019 तक के आंकड़े बताते हैं कि टाटा ग्रुप के कर्मचारियों की संख्‍या 7 लाख से अधिक थी. वहीं 31 मार्च 2019 तक टाटा ग्रुप का मार्केट 1,111,414 करोड़ रुपये था. एक साल पहले मार्च 2018 में ग्रुप का मार्केट कैप 945,117 करोड़ रुपये था.

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रतन टाटा के बारे में 25 रोचक जानकारियां

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रतन टाटा अपने 75वें जन्मदिन पर टाटा समूह से रिटायरमेंट ले रहे हैं। उन्होंने टाटा समूह को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।
टाटा समूह की कमान वे साइरस मिस्त्री को सौंपने जा रहे हैं। आइए जानते हैं स्टील मैन रतन टाटा के बारे में 25 रोचक जानकारियां-

1. रतन टाटा का जन्म 28 दिसंबर 1937 को हुआ।

2. वे टाटा समूह के संस्थापक जमशेदजी टाटा के दत्तक पोते नवल टाटा के बेटे हैं।
3. रतन टाटा की स्कूल शिक्षा मुंबई में हुई।

4. रतन टाटा ने कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से आर्किटेक्चर बीएस और हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से एडवांस मैनेजमेंट प्रोग्राम किया।

5. रतन टाटा ने 1962 में टाटा समूह के साथ अपना करियर प्रारंभ किया।

6. रतन टाटा 1991 में जेआरडी टाटा के बाद समूह के पांचवें अध्यक्ष बने।
7. रतन टाटा को 2000 में पद्‍मभूषण और 2008 में पद्‍मविभूषण से सम्मानित किया गया।

8. रतन टाटा ने टेटली, जगुआर लैंड रोवर और कोरस जैसी कंपनियों का टाटा समूह में अधिग्रहण किया।

9. रतन टाटा ने नैनो जैसी लखटकिया कार बनाकर आम आदमी का कार का सपना साकार किया।
10. वे इंडिका जैसी कार भी बाजार में लाए।

11. रतन टाटा के टाटा परिवार से खून के रिश्ते नहीं हैं। उनके पिता नवल एच टाटा सर रतन टाटा और उनकी बीवी नवजबाई सेठ के गोद लिए हुए बेटे थे।

12. बचपन में ही रतन टाटा के माता-पिता अलग हो गए थे लेकिन वे तब भी अपनी मां के करीब थे।

13. जब रतन टाटा समूह में आए थे, तब कपंनी का कुल कारोबार 10000 करोड़ रुपए था, जबकि 2011-12 में समूह का राजस्व ही 475.721 करोड़ रुपए हो गया है।

14. टाटा ने विकसित देशों की कई ऐसी कंपनियों का अधिग्रहण कर लिया जो अपने देश में सुपर ब्रांड थीं।

15. रतन टाटा रिटायरमेंट के बाद अपने पसंदीदा पियानो और विमान उड़ाने के शौक को पूरा करेंगे।

16. आज 80 देशों में टाटा समूह की कंपनियां मौजूद हैं।

17 रतन टाटा के नेतृत्व में ही पिछले वित्त वर्ष में टाटा समूह का राजस्व 379675 करोड़ रुपए रहा।

18. रिटारमेंट के बाद रतन टाटा मुंबई के कोलाबा स्थित बंगले में रहेंगे। 13350 वर्गफुट पर बना यह सी-फेसिंग बंगला तीन मंजिला है।

19. रतन टाटा की फिलॉसफी है- क्या कंपनी के लिए अच्छा है, क्या दुनिया के लिए अच्छा है।

20. रतन टाटा ने 21 साल के अपने करियर में टाटा समूह को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।

21. मुंबई आतंकी हमले के दौरान मुंबई में उनकी पांच सितारा होटल को निशाना बनाया गया, तब उन्होंने अपने कर्मचारियों की खुले हाथों से मदद की।

22. ताज होटल पर हमले के बाद रतन टाटा खुद वहां पहुंचे थे। टाटा खुद हर घायल के घर गए और परिजनों को भरोसा दिलाया।

23. रतन टाटा ने अपने कर्मचारियों की ही नहीं, हमले में प्रभावित आसपास के ठेलेवालों की भी मदद की।

24. 2010 में कॉर्पोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया टैप मामले में टाटा का नाम भी उछला था।

25. टाटा इससे पहले दो बार रिटायरमेंट की घोषणा कर चुके हैं। 2002 में टाटा 65 साल के हुए थे, तब कंपनी ने उन्हें रिटायर नहीं होने दिया। तीन साल बाद फिर ऐसे ही हालात बने तो बोर्ड ने कंपनी में सेवानिवृत्ति की आयु 75 साल कर दी।

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82 साल के हुए रतन टाटा, जेआरडी की विरासत को आगे ले जाने में है बहुत बड़ा हाथ

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देश के दिग्गज उद्योगपति और टाटा संस के मार्गदर्शक चेयरमैन रतन टाटा शनिवार को 82 साल के हो गए हैं। 28 दिसंबर 1937 में (तत्कालीन बॉम्बे) मुंबई में जन्म हुआ था। भारत के दो सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार- पद्म विभूषण (2008) और पद्म भूषण (2000) के प्राप्तकर्ता हैं। वह प्रतिष्ठित कैथेड्रल और जॉन कानोन स्कूल, बिशप कॉटन स्कूल (शिमला), कॉर्नेल यूनिवर्सिटी और हार्वर्ड के पूर्व छात्र हैं।

मुकेश अंबानी से ज्यादा संपत्ति है टाटा संस के पास

रिलायंस इंडस्ट्री के संस्थापक धीरूभाई अंबानी का भी आज जन्म दिन है। लंबे अरसे से इंडियन इंडस्ट्री और 108 कंपनियों वाले टाटा संस को नए मुकाम पर पहुंचाने के बाद भी लोगों को इस बात से हैरानी होती है कि रतन टाटा देश के अमीरों की लिस्ट में शामिल क्यों नहीं हैं? रतन टाटा, मुकेश अंबानी से ज्यादा अमीर नहीं हैं जबकि टोटल एसेट्स के मामले में टाटा संस, रिलायंस इंडस्ट्रीज से ज्यादा बड़ा ग्रुप है। टाटा संस को टाटा ट्रस्ट की ओर से चलाया जाता है और यह सभी जानते हैं कि ट्रस्ट पर किसी एक व्यक्ति का अधिकार नहीं होता है। टाटा फैमिली से जुड़ा होने के कारण रतन टाटा इसके चेयरमैन या ट्रस्टी तो हो सकते हैं लेकिन इसके मालिक नहीं क्योंकि टाटा संस में टाटा ट्रस्ट की हिस्सेदारी 66 फीसदी है।

1991 में टाटा ग्रुप की कमान

1962 से टाटा ग्रुप में काम शुरू करने के बाद रतन टाटा ने 1991 में टाटा ग्रुप की कमान संभाली थी उनकी अगुवाई में टाटा ग्रुप ने भारत समेत दुनियाभर में विस्तार किया है। बता दें कि टाटा संस ग्रुप की अगुवा कंपनी है। टाटा संस की इक्विटी शेयर पूंजी का 66 फीसदी हिस्सा परोपकारी ट्रस्टों के पास है। ये ट्रस्ट शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका उत्पादन और कला-संस्कृति के लिए काम करते हैं। टाटा ग्रुप के अधीन आने वाली हर कंपनियों का मैनेजमेंट और अन्य गतिविधियां स्वतंत्र हैं।

100 से अधिक देशों में है कारोबार

टाटा अलग-अलग कंपनियों के जरिए 100 से अधिक देशों में कारोबार कर रही है। इस ग्रुप का टीसीएस के जरिए आईटी सेक्टर में दबदबा है तो वहीं टाटा स्टील ने भारत समेत दुनिया भर की स्टील इंडस्ट्री में अपनी एक खास पहचान बनाई है। इसी तरह ऑटो इंडस्ट्री में टाटा मोटर्स समेत अन्य व्हीकल्स ने नाम कमाया है. इसके अलावा कंज्यूमर और रिटेल इंडस्ट्रीज, इंफ्रास्ट्रक्चर इंडस्ट्रीज, फाइनेंशियल सर्विसेज, एयरोस्पेस और डिफेंस में भी टाटा ग्रुप ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है। टूरिज्म और ट्रेवल, टेलीकॉम और मीडिया, ट्रेडिंग और इन्वेस्टमेंट सेक्टर में भी टाटा ग्रुप अपना लोहा मनवा रही है। बता दें कि टाटा ग्रुप शिक्षा, सशक्तिकरण, पर्यावरण और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी सक्रिय है। यही नहीं, टाटा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मैराथन, चेस और टेनिस टूर्नामेंट के अलावा कई तरह के क्विज को स्पॉन्सर किया है। इसके अलावा भारत समेत दुनिया के अलग- अलग हिस्सों में टाटा ग्रुप का इनोवेशन सेंटर भी है।

इतनी कंपनियों की संभाल चुके हैं जिम्मेदारी

रतन टाटा अभी तक टाटा संस, टाटा इंडस्ट्रीज, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील और टाटा केमिकल्स के मानद चेयरमैन हैं। रतन टाटा टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, टाटा कंसलटेंसी सर्विस, टाटा पावर, टाटा ग्लोबल बिवरेज, टाटा केमिकल, ताज ग्रुप और टाटा टेलीसर्विसेस के अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।  उनके कार्यकाल के दौरान 2011-12 में टाटा समूह के राजस्व में कई गुना वृद्धि हुई।

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