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टाटा नेक्सॉन को मिले NCAP Crash Tests में 5 स्टार अभ तक की सबसे हाई रेटिंग 4 स्टार पे महिन्द्रा Marazzo

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सबकंपैक्ट टाटा नेक्सन एसयूवी ने सितारों के लिए सचमुच लक्ष्य रखा है! ग्लोबल एनसीएपी से रिकॉर्ड-निर्माण 5 सितारा क्रैश सुरक्षा रेटिंग के साथ नेक्सन में अधिकतम संभव सितारे हैं। टाटा नेक्सन किसी भी निर्माता से इसे प्राप्त करने के लिए भारत कार में पहली बार बनाया गया है।

इस साल अगस्त में वैश्विक एनसीएपी के दुर्घटना परीक्षण में 4 सितारों के स्कोर के बाद, टाटा नेक्सन ने दूरी तय करके और भारत की पहली 5 स्टार कार बनकर इतिहास बना दिया है। नेक्सन ने इसे संभव 17 में से 16.06 अंक स्कोर करके हासिल किया है – अभी तक किसी भी भारतीय निर्मित कार के लिए उच्चतम। यह काम एक बहुराष्ट्रीय के बजाय एक भारतीय निर्माता से महत्वपूर्ण महत्व का है। कार को साइड इफेक्ट क्रैश टेस्ट भी मिला, जो इस रेटिंग को हासिल करने के लिए जरूरी है। गन्टर बुट्शेक, एमडी, टाटा मोटर्स ने कारंडबाइक को बताया, “वैश्विक-एनसीएपी में 5 सितारों को प्राप्त करने वाला नेक्सन एक आदर्श उपलब्धि है, और भविष्य के उत्पाद पोर्टफोलियो के लिए हमारे इरादे को मजबूत करता है।”

लेकिन टाटा नेक्सन को 4 से 5 सितारों में जाने में वास्तव में क्या मदद मिली? ग्लोबल एनसीएपी के तकनीकी निदेशक अलेजैंड्रो फरस बताते हैं, “एक पूर्ण चैनल संस्करण में एबीएस, या एंटी-लॉकिंग ब्रेक, सभी कारों के लिए एक मानक फिटनेस है, इसलिए सभी नेक्सन के पहियों में चार चैनलों में एबीएस है। साथ ही, सीट बेल्ट अनुस्मारक को अब निर्माता द्वारा ड्राइवर और यात्री पक्ष के लिए मानक सुविधा के रूप में भी पेश किया गया था। ” अगस्त टेस्ट के बाद से टाटा नेक्सन का बॉडी खोल और संरचना अपरिवर्तित बनी हुई है, और यह हमेशा मानक के रूप में दोहरी एयरबैग थी। कार बच्चे की सुरक्षा सुरक्षा के लिए अपनी 3 सितारा रेटिंग भी बरकरार रखती है।

टाटा मोटर्स के अध्यक्ष, पैसेंजर वाहन बिजनेस यूनिट के अध्यक्ष मयंक पारीक कहते हैं, “कुछ साल पहले, कोई भी नहीं मानता था कि सुरक्षा भारत में बेची जाएगी। हालांकि, आज के भारतीय ग्राहक विकसित हुए हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। वे अधिक जागरूक हैं सुरक्षा और कार खरीद की शीर्ष प्राथमिकताओं में वाहन सुरक्षा डालना शुरू कर दिया है। ”

टाटा नेक्सन की पहले 4 और अब 5 स्टार रेटिंग अन्य निर्माताओं को भी कार्रवाई में डाल रही है। और अब हम भारत से 4 या 5 सितारा कारों की झड़प की उम्मीद करते हैं। यह भारतीय उद्योग और भारतीय उपभोक्ता के लिए अच्छी खबर है – चूंकि ये परीक्षण और परिणाम भारत सरकार द्वारा लागू किए गए नए अनिवार्य सुरक्षा विनियम से अधिक कड़े हैं। “यह कार पूरी तरह से भारत में इंजीनियर थी और इसलिए ऐसा नहीं है कि इसे कहीं और तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता है। इसलिए यह आपको दिखाता है कि भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग क्या सक्षम है। और दूसरी बात यह पहचानने के लिए है कि यह भी बेहतर दुर्घटना का परिणाम है भारतीय सरकार से परीक्षण नियम। यह एक शानदार सफलता की कहानी है – वाहन सुरक्षा के आसपास भारत की सफलता की कहानी में बनाया गया है। ” ग्लोबल एनसीएपी के महासचिव डेविड वार्ड ने कहा।

टाटा सुरक्षा एजेंडा को धक्का देने की योजना बना रहा है और सभी भविष्य की कारों को 5 या न्यूनतम 4 स्टार सुरक्षा रेटिंग को पूरा करने की इच्छा रखता है। यह संभव है कि अगली कार का परीक्षण किया जा रहा है, आगामी हैरियर कॉम्पैक्ट एसयूवी होगा, हालांकि टाटा अपनी छोटी कारों जैसे टियागो और टॉगर की बिल्ड गुणवत्ता को प्रदर्शित करने के इच्छुक है।

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Bajaj Auto new Quadricycle Qute: Venets News

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कालका-शिमला हेरिटेज ट्रैक पर चलती ट्रेन  के इंजन में लगी आग

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विश्व हैरिटेज घोषित हो चुके कालका-शिमला रेल मार्ग पर मंगलवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। जानकारी के अनुसार कुमारहट्टी के नजदीक कालका से शिमला जा रही ट्रेन के इंजन में अचानक आग लग गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इंजन में आग लगते ही ट्रेन को मौके पर रोक दिया गया और आसपास मौजूद लोगों यात्रियों, रेल के चालकों ने आग को बुझाने का काम शुरू किया। देखते ही देखते आसपास के लोग बड़ी संख्या पर मौके पर पहुंचे और आग बुझानी शुरू की। कुछ लोगों ने इंजन में लगी आग का वीडियो भी बनाया और उसे सोशल मीडिया पर खूब वायरल भी किया।

जानकारी के अनुसार 52455 हिमालयन क्वीन 12 बजकर 10 मिनट पर कालका से चली थी। धर्मपुर रेलवे स्टेशन तक यह ट्रेन बिल्कुल ठीक पहुंची। धर्मपुर रेलवे स्टेशन से यह ट्रेन थोड़ा आगे पहुंची ही थी कि कुमारहट्टी के नजदीक इसके इंजन में अचानक आग लग गई। मिली जानकारी के अनुसार मौके पर रेलवे कर्मचारी व स्थानीय लोग आग बुझाने के कार्य में जुटे हुए थे। बताया जा रहा है कि ट्रेन खचाखच भरी हुई थी। जिस इंजन में आग लगी वह डीजल इंजन है।

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जन्मदिन विशेष: संजय गांधी ने रखी थी मारुति की नींव, बचपन से ही था इंजीनियरिंग का शौक

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जन्मदिन विशेष: संजय गांधी ने रखी थी मारुति की नींव, बचपन से ही था इंजीनियरिंग का शौक

संजय गांधी (Sanjay Gandhi) का जन्म 14 दिसंबर 1946 में दिल्ली में हुआ था. संजय गांधी इंदिरा गांधी के छोटे बेटे थे. उन्होंने खुद से 10 साल छोटी मेनका से शादी की थी.
संजय गांधी (Sanjay Gandhi) ने रखी थी मारुति की नींव
1971 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) ने एक ऐसी ‘गाड़ी’ के निर्माण का प्रस्ताव दिया, जिसे आम आदमी खरीद सके. उन्होंने “पीपल्स कार” बनवाने का निर्णय लिया. जून, 1971 में कंपनी एक्ट के अंतर्गत एक कंपनी ‘मारुति लिमिटेड’ का गठन किया गया और संजय गांधी इसके पहले मैनेजिंग डायरेक्टर बन गए. बिना तजुर्बे, नेटवर्क और डिजाइन के ही संजय को इस परियोजना का लाइसेंस दे दिया गया था. उन्होंने वर्कशॉप में मारुति का डिजाइन बनाने की कोशिश की. संजय ने वॉक्सवैगन से भी बात की थी. लेकिन वॉक्सवैगन से किसी भी तरह का समझौता नहीं हुआ था. कंपनी को लगातार नुकसान हो रहा था. 1980 में संजय गांधी की मृत्यु के बाद मारुती लिमिटेड ने जापान की सुजुकी कंपनी से हाथ मिलाया. जिसके बाद भारत की पहली सामान्य लोगों की कार मारुती 800 का उत्पादन शुरू हुआ. मारुती 800 को 14 दिसंबर 1983 को भारतीय बाजार में लॉन्च किया गया था. तत्कालिन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पहली कार की चाभियां दिल्ली मे आयोजित एक समारोह मे हरपाल सिंह को सौपी थी.
हालांकि कुछ लोग आज भी इसका श्रेय उन्हें नहीं देना चाहते ।जिस पर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और आँध्र प्रदेश के राज्यपाल रह चुके नारायण दत्त तिवारी कहते कहा करते थे कि उन्होंने वर्कशॉप में मारुति का डिज़ाइन बनाने की कोशिश की थी। मारुति कार भारत में बन रही है और उसका निर्यात भी किया जा रहा है, लेकिन इसकी नींव संजय गाँधी ने ही डाली थी।

संजय और मेनका की प्रेम कहानी
संजय गांधी ने खुद से 10 साल छोटी मेनका (Maneka Gandhi) से शादी की थी. फ्री प्रेस जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक मेनका 1973 में दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज में मिस लेडी बनी थीं. जिसके बाद उन्हें मॉडलिंग के ऑफर आने लगे थे. मेनका ने अपना पहला ऐड बॉम्बे डाईंग के लिए किया था. इस विज्ञापन को देखने के बाद ही संजय मेनका को पसंद करने लगे थे. संजय मेनका की चचेरी बहन वीनू कपूर के दोस्त थे. संजय और मेनका की पहली मुलाकात 1973 में वीनू की शादी से पहले हुई एक पार्टी में हुई थी. जिसके बाद उनके बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं. “द संजय स्टोरी” में विनोद मेहता ने लिखा, “संजय ने मेनका के पिता कर्नल आनंद से उनका हाथ मांगा, मेनका के पिता को ऐतराज नहीं था, उन्होंने संजय से कहा कि वह पहले अपनी मां से तो बात कर लें. इंदिरा ने मेनका को बुलाया. उन्होंने मेनका (Maneka Gandhi) से कहा कि संजय उनसे 10 साल बड़े हैं. मेनका का कहना था कि उन्हें इस बारे में पता है, लेकिन उन्हें कोई दिक्कत नहीं है. संजय और मेनका की शादी 29 सितंबर 1974 को हुई थी. उनकी शादी गांधी परिवार के मित्र मोहम्मद यूनुस के घर पर हुई थी.

जब संजय ने मेनका का हाथ मांगा
“द संजय स्टोरी” में विनोद मेहता ने लिखा, “संजय ने दिवंगत कर्नल आनंद से बेटी का हाथ उनके हाथ में देने का अनुरोध किया. कर्नल आनंद का कहना था कि उन्हें तो कोई एतराज नहीं, लेकिन वो पहले अपनी मां से तो बात कर लें.”

किताब में बताया गया, “जब श्रीमती इंदिरा गांधी ने ये सुना कि उनका बेटा शादी करने की सोच रहा है तो उन्होंने राहत की सांस ली हालांकि वो आश्वस्त नहीं थीं कि मेनका उनके बेटे के लिए कितनी सही रहेंगी. इंदिरा ने मेनका को बुलाया. उनसे लंबी गंभीर बात की, बातचीत में दो प्वाइंट्स पर खास जोर दिया, पहला, उनके बेटे के साथ रहना आसान नहीं.

दूसरी बात इंदिरा को ज्यादा चिंता में डाल रही थी कि मेनका से संजय दस साल बड़े हैं. मेनका संक्षिप्त जवाब दिया, वो दोनों बातें जानती हैं लेकिन उन्हें दिक्कत नहीं है. आखिरकार प्यार की जीत हुई.”

महिलाओं से नजदीकियों के आरोप
वैसे संजय पर कई बार आरोप लगे कि महिलाएं उनके करीब रहती हैं, लेकिन कभी कोई ऐसी बात खुलकर शायद कभी सामने आई हो. हालांकि दिल्ली में उस जमाने मे धनी कारोबारी कुलदीप नारंग से संजय की दोस्ती पर अलग अलग तरह से टिप्पणियां हुईं.

कुलदीप नैयर अपनी किताब “इमर्जेंसी रिटोल्ड” में कहते हैं कि नारंग के उकसावे पर संजय ने कई काम किये. वहीं पत्रकार कूमी कपूर किताब “इमर्जेंसीः ए पर्सनल हिस्ट्री “ में लिखती हैं किस तरह नारंग आपातकाल में संजय गांधी के लिए तमाम बातें सूंघते फिरते थे.

विनोद मेहता अपनी किताब “द संजय स्टोरी” में इशारों में कहते हैं किस तरह नारंग ने संजय की कमजोरी को लेकर महिलाओं को चारे की तरह इस्तेमाल किया. हालांकि मेहता ने भी ये बात किसी मिडल मैन के उद्धरण के तौर पर कही. ये भी लिखा कि प्रधानमंत्री के बेटे होने के कारण महिलाएं अलग अलग मंशाएं लेकर उनके चारों ओर मंडराती थीं.

स्तब्ध कर देने वाली मौत
23 जून 1980 का दिन स्तब्धकारी खबर लेकर आया. ये खबर थी विमान उड़ाते हुए हादसे में संजय गांधी के निधन की. उनके बारे में कहा जाता है कि वो विमान को कार की तरह चलाया करते थे. विमान को तेज़ हवा में कलाबाज़ियां खिलाना उनका शौक था. 1976 में उन्हें हल्के विमान उड़ाने का लाइसेंस मिला था, जो इंदिरा गाँधी के सत्ता से हटते ही जनता सरकार ने लाइसेंस छीन लिया था.
इंदिरा गांधी के सत्ता में दोबारा लौटते ही उन्हें ये लाइसेंस वापस मिल गया. मई 1980 में टू सीटर विमान ‘पिट्स एस 2ए’ को भारत आयात करने की मंजूरी मिल गई थी. आनन फानन में ये विमान सफ़दरजंग हवाई अड्डे स्थित दिल्ली फ़्लाइंग क्लब में पहुंच भी गया.
संजय ने पहली बार 21 जून 1980 को नए पिट्स पर हाथ आज़माया. दूसरे दिन यानी 22 जून को पत्नी मेनका गांधी, इंदिरा गांधी के विशेष सहायक आर के धवन और धीरेंद्र ब्रह्मचारी को लेकर उड़ान भरी. 40 मिनट तक दिल्ली के आसमान पर विमान उड़ाते रहे. 23 जून को वो फिर विमान उड़ाने पहुंचे. वो इंस्ट्रक्टर सुभाष सक्सेना के साथ बैठे.

ठीक सात बजकर 58 मिनट पर उन्होंने टेक ऑफ़ किया. सुरक्षा नियमों को दरकिनार करते हुए रिहायशी इलाके के ऊपर तीन लूप लगाए. चौथी लूप लगाने ही वाले थे कि विमान के इंजन ने काम करना बंद कर दिया.. पिट्स तेज़ी से मुड़ा और नाक के बल ज़मीन से जा टकराया. नया पिट्स टू सीटर मुड़ी हुई धातु में बदल चुका था. उसमें से गहरा काला धुंआ निकल रहा था. किसी तरह विमान के मलबे से दोनों के शरीर निकाले गए. तुरंत एक एंबुलेंस उन्हें लेकर राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंची, जहां दोनों को मृत घोषित कर दिया गया.

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