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FACEBOOK SHAREHOLDERS CALL FOR MARK ZUCKERBERG TO BE KICKED OUT AS CHAIRMAN

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FACEBOOk MARK ZUCKERBERG

Mark Zuckerberg’s strong control over Facebook has come under question after several high-profile investors called for him to step down as chairman of the company.

The shareholder proposal follows a series of controversies and scandals at the technology firm, including large-scale data breaches and accusations that the social network has become a platform for misinformation campaigns and political propaganda.

State and city treasurers from Illinois, Rhode Island and Pennsylvania joined the New York City Pension Funds and Trillium Asset Management in requesting the Facebook board of directors to make the role of chairman an independent position.

“Doing so is best governance practice that will be in the interest of shareholders, employees, users, and our democracy,” the filing states.

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The proposal cites Facebook’s “mishandling” of “severe controversies,” including how the social network was used to manipulate the 2016 US presidential elections through Russian troll farms, and the sharing of data with Chinese device manufacturers like Huawei.

According to the shareholders, Facebook’s governance structure puts investors at risk and should fall in line with other major tech firms like Google, Microsoft and Apple in having separate CEO and chairperson roles.

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“Facebook plays an outsized role in our society and our economy. They have a social and financial responsibility to be transparent – that’s why we’re demanding independence and accountability in the company’s boardroom,” said New York City Comptroller Scott Stringer.

“An independent board chair is essential to moving Facebook forward from this mess, and to reestablish trust with Americans and investors alike.”

The proposal will be put to a vote at the company’s annual shareholder meeting in May 2019, however, it will be largely symbolic due to the control that Mr Zuckerberg has over the company’s board.

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Mr Zuckerberg’s reign at Facebook has previously been compared to a dictatorship because he owns a majority of voting rights to the firm.

In an op-ed earlier this year, a member of the California State Teachers’ Retirement System (CalSTRS), which holds shares in Facebook, called for the company to make changes to reflect its size.

“Facebook has grown at an unbelievable pace. The capital structure has changed and it is time for its governance to catch up,” CalSTRS investment officer Aeisha Mastagni wrote in The Financial Times.

“Why does Mr Zuckerberg need [voting control]? Is it because he does not want governance to evolve with the rest of his company? If so, this American dream is now akin to a dictatorship.”

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भगौड़े माल्या के प्रत्यर्पण को ब्रिटेन ने सहमति, ब्रिटिश ग्रहमंत्री ने किए दस्तख़त

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भगौड़े विजय माल्या पर लंबे समय से चल रही प्रत्यर्पण की बात पर रविवार को ब्रिटिश कोर्ट ने सहमति दे दी। ब्रिटेन राष्ट्रपति साजिद वाजिद ने इस पूरी प्रक्रिया पर दस्तख़त कर कार्यवाही को आगे बढाया। इस फैसले का भारत ने स्वागत किया, सरकारी सूत्रों की कहना है कि भारत इस प्रक्रिया के जल्द से जल्द पूरी हैने की प्रतीक्षा कर रहा है। विजय माल्या का कहना है कि वो इस फेसले के खिलाफ याचिका दायर करेगा। विजय माल्या के पास ऐसा करने के लिए सिर्फ 14 दिन शेष हैं।
ब्रिटेन ग्रह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने इस खबर की पुष्टि करते हुए कहा कि माल्या के प्रत्यर्पण से जुड़े दस्तावज़ों पर ग्रह मंत्री ने रविवार को हस्ताक्षर कर दिए। मंत्री जाविद ने यह फैसला उनके पास आने के लगभग दो महीने बाद ही यह फैसला आ गया। उन्होंने बताया कि 3 फरवरी को ग्रह राज्य सचिव ने प्रत्यर्पण से जुड़े सभी दस्तावेजों को ध्यान पूर्वक अध्ययन किया।
हालाँकि सरकारी सूत्रों का कहना है कि इस संबंध में वहाँ के विदेश मंत्रालय से अभी कोई सूचना नही है। “हमें यह सूचना ब्रिटेन के ग्रह मंत्रालय से मिली। हम यू के सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हैं और प्रत्यर्पण से जुड़ी प्रक्रिया के जल्द पूरा होने का इंतजार करते हैं।

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विडीयोकॉन ग्रुप के लोन घोटाले मामले में आइसीआइसीआइ की जांच के तहत चंदा कोचर दोषी करार

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एक स्वतंत्र पैनल ने वीडियोकॉन को दिए गए 3250 करोड़ रुपए लोन घोटाले मामले में ICICI बैंक की पूर्व प्रमुख चंदा कोचर को दोषी पाया है। पैनल के अनुसार चंदा कोचर ने इस मामले में आचार संहिता का उल्लंघन किया। ICICI बैंक के निदेशक मंडल ने फैसला कर उन्हे बर्खास्त करार दिया साथ ही यह फैसला भी किया गया कि कोचर को अप्रैल 2009 से मार्च 2018 तक दिए गए सभी बोनस को ब्याज समेत वापस मांगा जाएगा। बैंक ने इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बी श्रीकृष्णा की अगुवाई में करवाई थी। चंदा कोचर पर बैंक में मिले पद का गलत इस्तेमाल कर विडीयोकोन ग्रुप को कर्ज दे बैंक के नियमों के विरूध जा नीजी लाभ आरोप लगा है। बैंक ने बताया की कोचर ने बैंक के एनुअल डिस्क्लोजर भी गलत बताए जो कि बैंक की आचार संहिता के खिलाफ है जिस वजह से उन पर कार्रवाई की गई है। सीबीआई अलग से चंदा कोचर और उनके पति दीपक कोचर के खिलाफ साजिश और धोखधड़ी की मामला दर्ज कर रही है।

इस पूरे मामले की शुरूआत 2012 में हुई थी जब विडीयोकोन ग्रुप ने आइसीआइसीआइ बैंक से 3250 करोड़ रुपये का लोन लिया था। विडीयोकोन ग्रुप का यह लोन कुल 40 हजार करोड़ रुपये का एक हिस्सा था जिसे विडीयोकॉन ग्रुप ने एसबीआई के नेतृत्व में 20 बौंको से लिया था। 2010 में विडीयोकॉन ग्रुप के चेयरमैन वेणुगोपाल धूत पर यह आरोप लगाया गया था कि उन्होने न्यूपावर रीन्यूएबल्स प्राइवेट लिमीटेड (NRPL) को 64 करोड़ रुपये दिए थे। धूत ने इस कंपनी को दीपक कोचर और दो अन्य रिश्तेदारों के साथ मिलकर खड़ा किया था।

सीबआई ने 3250 करोड़ रुपए के कर्ज जारी करने के मामले में अनियमितताओं के आरोप में चंदा कोचर, दीपक कोचर और वेणूगोपाल धूत के खिलाफ केस दर्ज किया था।

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अमेरिका ने चीन की टेलीकॉम कंपनी हुवावे के खिलाफ 23 केस दर्ज कराए……

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सोमवार को चीन की टेलीकॉम कंपनी हुवावे और उसकी मुख्य वित्तिय अधिकारी मेंग वानझू के खिलाफ अमेरिका के न्याय विभाग ने आपराधिक मामला दर्ज कर लिया है। इन पर बैंक जालसाजी, न्याय में रूकावट डालने और अमेरिकी कंपनी टी मोबाइल की टेक्नोलॉजी चुराने का आरोप है। अमेरिका ने कुल मिलाकर 23 मामले दर्ज कराए हैं। लेकिन मेंग और हुवावे ने सभी आरोपों को गलत बताया है। मेंग हुवावे के संस्थापक की बेटी हैं।केस दर्ज कराते वक्त आरोप में कहा गया है कि पिछले 10 सालों से हुवावे आपराधिक गतिविधियों में शामिल है और इसमें कंपनी के बड़े अधिकारी भी शामिल हैं। हुवावे के खिलाफ अमेरिका की कार्रवाई के कारण अमेरिका-चीन के बीच हो रहे व्यापार और बतचीत पर असर पड़ सकता है। दोनों देशों के बीच 30-31 जनवरी को मिटींग के दौरान बातचीत होनी है।

पिछले महीने औपचारिक तौर पर मेंग को ईरान पर लगी पाबंदियों का पालन न करने के चलते अमेरिका के कहने पर कनाडा में गिरफ्तार किया गया था। एक दिसंबर को उन्हे वेंकूवर से पकड़ा गया था। हालांकि बाद में कोर्ट ने मेंग को लगभग 53 करोड़ रुपए के जुर्माने पर जमानत दे दी थी। लेकिन, वहां भी वे 24 घंटे निगरानी में हैं। इसके लिए उनके टखने में एक इलेक्ट्रॉनिक टैग लगा हुआ है। इस मामले के चलते चीन के अमेरिका और कनाडा से रिश्तों में बुरी तरह बिगड़ गए। नियमों के मुताबिक 30 जनवरी तक प्रत्यर्पण की अर्जी दाखिल करने की डेडलाइन है। अमेरिका का कहना है कि समय रहते वह अपील दायर कर देगा। आरोपों में कहा गया है कि हुवावे ने ईरान में कारोबार करने के लिए अमेरिका और एक वैश्विक बैंक को अपनी दो सहयोगी कंपनियों हुवावे डिवाइस अमेरिका और स्काईकॉम टेक से रिश्तों को लेकर गुमराह किया। वहीं एक अन्य मामले में भी यह आरोप है कि कंपनी ने स्मार्टफोन की क्षमता को जांचने की तकनीक टी मोबाइल से चुराई। टी मोबाइल ने फोन की जांच के लिए इंसानों के हाथों की अंगुलियों की नकल बनाई थी।

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